आज दिन निकला अपने अंदाज मे। है कुछ बदलाव हमारे भी मिजाज मे। गऐ गहराई मे तो मालूम हुआ हमे। है दुआंए अपनो कि इस आगाज मे। आबिद गोरखपुरी रात भर यूंही जगते है। आसमान को तकते है। नींद क्यो ना आती हमे बस यही सोचा करते है। हर रात यही किस्सा है। फिर भी ना सम्भलते है। होगा हल कब ये माजरा। रोज खुद से पूछा करते है। आबिद गोरखपुरी क्यो न फिर सब इंसान बन जाए। जमीं पे फिर नया जहान बन जाए। प्यार हो जहा हर शक्स के दिल मे। हर कोई इकदूजे कि जान बन जाए। आबिद गोरखपुरी ना बदल खुद को इतना जमाने के लिए। के ना रहे मादा खुदी को पहचानने के लिए। आबिद गोरखपुरी यॅूही यकीन अगर खुदा पर रहेगा। इंशाअल्लाह खुदा हर दुआ सुनेगा। आबिद गोरखपुरी बरसो गवा दिए यहॅा हमे जान पहचान मे। मिला ना कोइ अपना उम्र बीती इस काम मे। आबिद गोरखपुरी Na smazh ske ab tk jindgi ka falsfa diya dard jisne de rha hai vhi hosla abid gorkhpuri Kre kuch aesa ki har dam kushi rhe N hm dukhi ho n hmse koi dukhi rhe Abid Gorkhpuri आज फिर किसी ने किया परेशा। आज फिर हम भी हो गए परेशा । आबिद गोरखपुरी तन्हा है हम मगर कोई गम नही। जो है हमार...
this book is very helpful for student....and radio script writer .......in this book we can see how we can promot our culture with radio feature progammes.....sirohiwall ji exposed many issues related to our society and haryanvi culture in these radio feature in a very intersting way ....................
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