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privar
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परिवार वो नईया लगाए जो हर मजधार से पार, रिश्तो के च्प्पु से बदल दे जो हर मुशिक्ल धार। सॅस्कारों की पतवार सहना सिखाए जो दुख कि बौछार, घ्रर मे इकदूजे के लिए प्यार जो बनाए सफर को मजेदार, पर अब ये "एकल" शब्द करे इस नयिया को तार-तार, आओ दोस्तो उठो,जागो बचालो इस नईया को फिर इक बार, वरना हो जाऐगें हम हमेशा के लिए इससे बेजार। आबिद गोरखपुरी
"WHEN YOU WANT SOMETHING,ALL UNIVERSE CONSPIRES TO HELP YOU ACHIEVE IT
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